यह रहा भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 का विस्तृत हिंदी परिचय:
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 का परिचय
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 भारत के साक्ष्य कानून में एक ऐतिहासिक बदलाव है, जो ब्रिटिश काल के भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह लेता है। यह अधिनियम भारत सरकार द्वारा आपराधिक कानूनों के व्यापक सुधार के हिस्से के रूप में पारित किया गया है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता, 2023 (IPC का स्थानापन्न) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (CrPC का स्थानापन्न) भी शामिल हैं।
📜 विधायी यात्रा
- प्रस्तावक: गृह मंत्री अमित शाह
- प्रथम प्रस्तुति: 11 अगस्त 2023 (बाद में वापस लिया गया)
- पुनः प्रस्तुति: 12 दिसंबर 2023 को “भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक” के रूप में
- लोकसभा में पारित: 20 दिसंबर 2023
- राज्यसभा में पारित: 21 दिसंबर 2023
- राष्ट्रपति की स्वीकृति: 25 दिसंबर 2023
- प्रभावी तिथि: 1 जुलाई 2024
🎯 उद्देश्य और क्षेत्राधिकार
इस अधिनियम का उद्देश्य है:
- साक्ष्य के नियमों का आधुनिकीकरण और समेकन
- निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना
- इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्य को विधिक मान्यता देना
- पुराने औपनिवेशिक शब्दों और अवधारणाओं को हटाना
यह अधिनियम सभी न्यायिक कार्यवाहियों पर लागू होता है, जिसमें कोर्ट मार्शल भी शामिल हैं — जिन्हें पहले भारतीय साक्ष्य अधिनियम से बाहर रखा गया था।
🧱 संरचना का अवलोकन
इस अधिनियम में कुल 170 धाराएँ हैं, जबकि पुराने अधिनियम में 167 थीं:
- 23 धाराओं में संशोधन
- 5 धाराएँ हटाई गईं
- 1 नई धारा जोड़ी गई
मुख्य अध्यायों में शामिल हैं:
- तथ्यों की प्रासंगिकता (धारा 3–50)
- साक्ष्य का प्रमाण (धारा 51–53)
- मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य (धारा 54–93)
- इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख और विशेषज्ञ राय
- स्वीकृतियाँ, इक़बाल और अनुपलब्ध गवाहों के बयान
🔍 प्रमुख नवाचार
- डिजिटल साक्ष्य की वैधता: इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल हस्ताक्षरों को साक्ष्य के रूप में मान्यता
- शब्दावली का अद्यतन: “वकील” और “पागल” जैसे शब्दों को “अधिवक्ता” और “अविवेकी व्यक्ति” से प्रतिस्थापित किया गया
- अन्य कानूनों से समन्वय: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के साथ परिभाषाओं का सामंजस्य
यह अधिनियम भारत की न्याय प्रणाली को उपनिवेशवाद से मुक्त करने और डिजिटल युग की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में एक साहसिक कदम है। यदि आप चाहें, तो मैं इसकी प्रमुख धाराओं या पुराने अधिनियम से तुलना भी कर सकता हूँ।
📘 Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023: सूचनात्मक FAQ
🔹 अधिनियम का परिचय
Q1: Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 कब लागू हुआ?
A: यह अधिनियम 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हुआ है।
Q2: यह किस अधिनियम को प्रतिस्थापित करता है?
A: यह Indian Evidence Act, 1872 को पूरी तरह से निरस्त कर उसकी जगह लागू हुआ है।
Q3: इस अधिनियम में कुल कितनी धाराएं हैं?
A: इसमें कुल 170 धाराएं हैं, जो 12 अध्यायों में विभाजित हैं।
Q4: इस अधिनियम का उद्देश्य क्या है?
A: न्यायिक कार्यवाहियों में साक्ष्य की प्रासंगिकता, ग्राह्यता और प्रक्रिया को आधुनिक डिजिटल युग के अनुसार पुनः परिभाषित करना।
Q5: क्या यह अधिनियम पुराने मामलों पर लागू होगा?
A: नहीं, जो मामले BSA लागू होने से पहले शुरू हुए हैं, वे Indian Evidence Act, 1872 के तहत ही निपटाए जाएंगे।
🔹 प्रमुख बदलाव
Q6: क्या डिजिटल साक्ष्य को विशेष रूप से शामिल किया गया है?
A: हाँ, “दस्तावेज़” और “साक्ष्य” की परिभाषा में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
Q7: क्या WhatsApp चैट, ईमेल, स्क्रीनशॉट आदि अब सीधे ग्राह्य हैं?
A: हाँ, यदि वे उचित प्रमाणिकता के साथ प्रस्तुत किए जाएं।
Q8: क्या पुराने अधिनियम की धारा संरचना पूरी तरह बदली गई है?
A: हाँ, नए अधिनियम में धाराओं का पुनर्गठन किया गया है और भाषा को सरल बनाया गया है।
Q9: क्या न्यायालय को साक्ष्य की प्रक्रिया में अधिक विवेक दिया गया है?
A: हाँ, न्यायालय को साक्ष्य की प्रासंगिकता और ग्राह्यता तय करने में अधिक स्वतंत्रता दी गई है।
Q10: क्या यह अधिनियम तकनीकी विशेषज्ञता को महत्व देता है?
A: हाँ, विशेष रूप से डिजिटल साक्ष्य के मामलों में विशेषज्ञ साक्ष्य की भूमिका को स्पष्ट किया गया है।
🔹 संरचना और अध्याय
Q11: अध्याय I किससे संबंधित है?
A: प्रारंभिक प्रावधान — शीर्षक, परिभाषाएं, और लागू क्षेत्र।
Q12: अध्याय II में क्या शामिल है?
A: तथ्य की प्रासंगिकता — जैसे लेन-देन, षड्यंत्र, मानसिक स्थिति, इक़रार आदि।
Q13: अध्याय III किस विषय को कवर करता है?
A: वे तथ्य जिन्हें सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है — जैसे न्यायिक संज्ञान।
Q14: अध्याय IV और V किससे संबंधित हैं?
A: मौखिक साक्ष्य और दस्तावेजी साक्ष्य की प्रक्रिया और प्रमाणिकता।
Q15: क्या अधिनियम में न्यायिक निर्णयों की ग्राह्यता पर भी प्रावधान है?
A: हाँ, अध्याय VI में यह स्पष्ट किया गया है कि किन निर्णयों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।
बिलकुल! नीचे मैं भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 पर आधारित प्रश्नों की क्रम संख्या को 15 के बाद सही तरीके से जारी कर रहा हूँ। यह सूची पहले से दिए गए प्रश्नों के क्रम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाती है।
📘 भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872: क्रम संख्या 16 से आगे
16. धारा 6 किस सिद्धांत पर आधारित है?
उत्तर: Res Gestae — यानी घटना से जुड़े सभी तथ्य प्रासंगिक होते हैं।
17. धारा 7 किससे संबंधित है?
उत्तर: कारण और प्रभाव से जुड़े तथ्य।
18. धारा 8 में किस प्रकार के तथ्य प्रासंगिक होते हैं?
उत्तर: उद्देश्य, तैयारी और आचरण।
19. धारा 9 का प्रयोग कब होता है?
उत्तर: पहचान और पुष्टि के लिए।
20. धारा 10 किससे संबंधित है?
उत्तर: षड्यंत्र से जुड़े तथ्य।
21. धारा 11 कब लागू होती है?
उत्तर: जब कोई तथ्य सामान्यतः अप्रासंगिक हो लेकिन विशेष परिस्थिति में प्रासंगिक बन जाए।
22. धारा 17 में इक़रार की परिभाषा क्या है?
उत्तर: कोई कथन जो किसी तथ्य को स्वीकार करता है।
23. धारा 24 क्या कहती है?
उत्तर: धमकी, प्रलोभन या वादा से प्राप्त इक़रार अमान्य होता है।
24. पुलिस अधिकारी को दिया गया इक़रार किस धारा में अमान्य है?
उत्तर: धारा 25।
25. धारा 27 में क्या अपवाद है?
उत्तर: पुलिस हिरासत में इक़रार से प्राप्त तथ्य ग्राह्य हो सकते हैं।
26. धारा 30 किससे संबंधित है?
उत्तर: सह-अभियुक्त की इक़रार।
27. धारा 31 क्या कहती है?
उत्तर: इक़रार के प्रभाव।
28. साक्ष्य का भार किस पर होता है?
उत्तर: जिस पक्ष ने कोई तथ्य प्रस्तुत किया है, उसी पर उसका प्रमाण देने का भार होता है।
29. धारा 101 किससे संबंधित है?
उत्तर: साक्ष्य का भार किस पर है, यह निर्धारित करती है।
30. धारा 114 में क्या बताया गया है?
उत्तर: न्यायालय कुछ सामान्य बातों को मान सकता है, जैसे कि सामान्य मानव व्यवहार।
31. क्या न्यायालय अनुमान लगा सकता है?
उत्तर: हाँ, धारा 114 के तहत।
32. धारा 113A किससे संबंधित है?
उत्तर: विवाहिता महिला की आत्महत्या के मामलों में अनुमान।
33. धारा 113B किससे संबंधित है?
उत्तर: दहेज मृत्यु के मामलों में अनुमान।
34. धारा 114A किससे संबंधित है?
उत्तर: बलात्कार के मामलों में सहमति का अनुमान।
35. धारा 115 किस सिद्धांत पर आधारित है?
उत्तर: प्रतिषेध (Estoppel) — कोई व्यक्ति अपने पूर्व कथन से मुकर नहीं सकता।
Sources:
India Law Acts – BSA 2023 Sections
LegallyIn – What’s New in BSA 2023